
Ravi ji….

दुनिया के इन प्रमुख समाचार पत्रों में भारत के चुनाव आयोग बनाम राहुल गााधी के विवादित प्रर्दशनों को प्रकाशित किया गया है जिनमे ब्रिटेन के द गार्डियन, क़तर के अल जज़ीरा, जर्मनी के डॉयचे वेले, पाकिस्तान के डॉन ,और जियो न्यूज़ ,जैसे आउटलेट्स ने इस पूरे विवाद को अलग.अलग एंगल से कवर किया है
विपक्ष लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहा है लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और कई विपक्षी नेताओं ने इस मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया वही कॉकरोच जनता पार्टी ;सीजेपी भी हमलावर है और मोदी सरकार और ज्ञानेश कुमार की मिलीभगत का आरोप लगा रही है वही 5 अक्तूबर की अपनी
विदेशी समाचार चत्रों ने अपनी
रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े एक विवादास्पद अभियान और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है हाल के दिनों में देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं विपक्षी दलों छात्र संगठनों और युवा.नेतृत्व वाले कॉकरोच आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है समाचार पत्र के मुताबिक आरोप हैं कि मतदाता सूचियों के इस पुनरीक्षण में विशेष रूप से मुसलमानों जैसे अल्पसंख्यक वर्ग को निशाना बनाया जाता है जो पारंपरिक रूप से मोदी की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के मतदाता नहीं हैं
क़तर के अल जज़ीरा के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं और एसआईआर के दौरान वोटर रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं साथ ही अल जज़ीरा ने चुनाव आयोग का पक्ष भी रखा कि एसआईआर का मक़सद डुप्लीकेट मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाकर वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना है
विदेशी अख़बार के मुताबिक आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में ऐसे दस्तावेज़ मांगे जाते हैं जो भ्रमित करने वाले और हासिल करने में कठिन होते हैंए जिससे लाखों एलिजबल वोटर्स के बाहर होने का ख़तरा पैदा हो गया हैण् चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में 30 प्रतिशत तक वोटर कम हो सकते हैं
इससे पहले अल जज़ीरा ने 2 अक्तूबर को बाकायदा एक विश्लेषण छापा था. कैन इंडियाज़ कॉकरोच मूवमेंट आउस्ट मोदीज़ इलेक्शन चीफ़ ;क्या भारत की कॉकरोच मुहिम मोदी के इलेक्शन चीफ़ को हटा पाएगी
इसमें राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि सरकार ने पिछले प्रदर्शनों से रणनीतिक सबक लिए हैं और इस बार वह प्रदर्शनकारियों को बड़ा जमावड़ा बनाने से पहले ही रोकने की कोशिश कर रही हैण् साथ ही विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि सीजेपी के युवा प्रदर्शनकारी अब पहले से कहीं ज़्यादा अनुभवी हैं
यहां एक अहम बात है अल जज़ीरा के विश्लेषण में सरकार के लिए चुनौती को केवल राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष से नहीं जोड़ा गया है युवा आंदोलन और विपक्ष के एक ही मुद्दे पर सड़क पर आने को बड़ा फैक्टर माना गया है
वही पाकिस्तान के जाने माने समाचार पत्र डॉन ने अपने लेख में हो रहे प्रदर्शन को मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच नई राजनीतिक चुनौती बताया गया है इसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोप और बीजेपी का जवाब तीनों शामिल हैं
जियो न्यूज़ के मुताबिक़ ज्ञानेश कुमार पर पीएम नरेंद्र मोदी की हिंदू नेशनलिस्ट पार्टी बीजेपी के इशारों पर काम करने का आरोप है