अब विदेशी मीडिया में भी गरमाया वोट चोरी और भारत के चुनाव आयोग का मुददा

भारत के अंग्रेज़ी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की चिराग से निकला जिन की रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग की ओर से लिए गए फ़ैसले को लेकर 14 बार आपत्तियां जताई थीं जारी रिपोर्ट के मुताबिक़ दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि इस दौरान लिए गए अहम फ़ैसलों में उन्हें शामिल नहीं किया गया था

अंतरराष्ट्रीय मीडिया बाजार में भारत के चुनाव आयोग की चर्चा गरम विभिन्न समाचार पत्रों में टिप्पणियों का दौर जारी

अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स कें मुताबिक भारत के चुनाव आयोग ने ऐसी चीज़ों को तेज़ी से लागू किया जिनसे करोड़ों लोगों के मतदान से वंचित होने का ख़तरा पैदा हो गया इसी दौरान तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने इन क़दमों की क़ानूनी वैधता को लेकर आपत्ति जताई थी भारत के एक प्रमुख अख़बार में प्रकाशित एक सनसनीखेज रिपोर्ट में यह बात सामने आई है भारत में विपक्षी दल अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते रहे हैं कि वो मतदान प्रक्रिया पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल अपनी भारतीय जनता पार्टी की सत्ता मज़बूत करने के लिए करते हैं लेकिन यह रिपोर्ट पहली बार चुनाव व्यवस्था के भीतर से उठ रही गंभीर आपत्तियां के संकेत दे रही है प्रकाशित रिपोर्ट की जांच का मुख्य फ़ोकस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ;एसआईआर नाम की प्रक्रिया पर था यह प्रक्रिया पिछले साल शुरू हुई थीण् इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया था लेकिन शुरुआत से ही इसे गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा
यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसमें काफ़ी अव्यवस्था रही है और देश के सबसे ग़रीब लोगों पर ऐसे दस्तावेज जमा करने का बोझ पड़ा है जिनकी ज़रूरतें कई बार एक.दूसरे से मेल नहीं खातीं इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एक बेहद कड़े मुकाबले वाले चुनाव से पहलेए जिसमें मोदी की पार्टी ने सत्तारूढ़ दल को हरा दियाए मतदाता सूची के संशोधन के दौरान लाखों लोगों के नाम हटा दिए गए थे

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग के मुताबिक एसआईआर में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने और इससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ने की आशंका ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है
ब्लूमबर्ग ने लिखा सितंबर के अंत में इस मुद्दे पर फिर सवाल उठे जब अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर दी कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने दस महीने की अवधि में कम से कम 14 बार इस प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने चिंता जताई थीण् चुनाव आयोग ने इस ख़बर का खंडन किया है हाल में चुनाव आयोग के भीतर से कथित असहमति की ख़बरों ने चुनावों की निगरानी करने वाली इस संस्था पर और सवाल खड़े किए हैं पिछले एक साल में राज्य विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी की लगातार जीत के बाद मतदाता सूची की सफाई का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है

बंगाल में हटाए गए 90 लाख नाम

अप्रैल में पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मतदाता सूची से क़रीब 90 लाख नाम हटाए गए थे इसके बाद बीजेपी ने पहली बार पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत हासिल की पिछले साल बिहार में भी विधानसभा चुनाव से पहले इसी तरह मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया था वहां भी बीजेपी और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने जीत हासिल की बीजेपी ने इन आरोपों से इनकार किया है राजनीतिक विश्लेषकों में भी इस बात पर मतभेद है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों पर एसआईआर का कितना असर पड़ा
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड और उन अधिकारियों के इंटरव्यू पर आधारित थी जिनकी पहचान अख़बार ने जाहिर नहीं की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने के साथ मतदाता सूची के प्रबंधन वाले सिस्टम के बढ़ते केंद्रीकरण को लेकर चिंताएं शामिल थीं

ब्लूमबर्ग के मुताबिक आयुक्तों ने यह भी कहा कि कुछ फ़ैसले लिए गए और आदेश जारी किए गए लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी विपक्षी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा यह बेहद गंभीर मुद्दा है यह हमारे लोकतंत्र के लिए घातक है

विधानसभा चुनावों में होगी मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा फ़ाइनेंशियल टाइम्स

फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी टिप्पड़ी में लिखा है कि चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद विधानसभा चुनावों में पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा हो सकती है
ब्रिटिश अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आने के बाद ज्ञानेश कुमार और सरकार के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग की है
समाचार पत्र के मुताबिक भारत में पुलिस ने कई शहरों में आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की पुलिस ने दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया ये लोग देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे आरोप है कि चुनाव आयोग ने ग़लत तरीक़े से लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं
इन प्रदर्शनों का आह्वान विपक्षी कांग्रेस पार्टी और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने किया था उनका आरोप है कि पिछले एक साल में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से राजनीतिक मुक़ाबले का संतुलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में झुक गया है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग ने किसी भी ग़लत काम से इनकार किया है

एफ़टी ने लिखा है जून 2025 में शुरू हुए देशव्यापी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ;एसआईआर के दौरान क़रीब 13 करोड़ लोगों के नाम शुरुआती वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं इनमें से कई लोगों ने नाम हटाए जाने के ख़िलाफ़ अपील की जिसके बाद उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए हालांकि अब तक अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है कि कितने लोगों के नाम वास्तव में मतदाता सूची से हटे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2029 तक लोकसभा चुनाव में वोट डालने वाले मतदाताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन अगले साल भारत का सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव उनकी लोकप्रियता के लिए अहम राजनीतिक टेस्ट होंगे

सरकार का कहना है कि मतदाता वोटर लिस्ट का रिवीजन एक सामान्य प्रक्रिया हैण् इसका मक़सद वोटर लिस्ट को अपडेट रखना और जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी हैए उनका इससे नाम हटाना है

क़तर के न्यूज आउटलेट अल जज़ीरा ने चुनाव आयोग से जुड़ी ख़बर प्रकाशित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए लिखा है कॉकरोच पार्टी के युवा आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त शनिवार तक इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो वह देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा अल जज़ीरा के मुताबिक विपक्षी दल लंबे समय से चुनाव आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं कि उसने बिना किसी सूचना के लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए और बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बिना उचित सत्यापन के नए मतदाताओं के नाम जोड़ दिए

जर्मनी के मीडिया नेटवर्क डीडब्ल्यू ने भी भारत के चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की ख़बरों को लेकर बढ़ते विवाद का ज़िक्र किया है डीडब्ल्यू ने लिखा है कि दिल्ली में विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनकारी जुटे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे़ की मांग की वही डीडब्ल्यू से बात करते हुए नेहा बोरा ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी करने और लोकतंत्र के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कहा कि प्रदर्शनकारी अपना आंदोलन जारी रखेंगे

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