तिलचट्टाओ ने बीजेपी को चाटने की करली तैयारी, आन्दोलन पड़ रहा है सत्ता पर भारी

भारतीय राजनीति में सत्ता परिवर्तन के लिए भूचाल लाने का माहौल जोरो से बना हुआ है जो बीते कुछ सप्ताह से रफ़्तार पकड़ चुका है हलाकि यहां ये स्पष्ट नही किया जा सकता कि यह आन्दोलन कहां जा के रूकेगा हलाकि जानकारों के अनुसार ये कहा जा रहा है कि दुनिया के कई देशो में हाल ही में हुए इसी विचार धारा के आन्दोलनों द्वारा सत्ता परिवर्तन हुआ है देखा जाए तो भारत इन मामलो में बाकी देशो के मुकाबले में अपनी अलग ताकत रखता है लेकिन इस अभियान ने सत्ता की इस ताकत को भाी हिला दिया है हलाकि भाजपा की रणनीति को चाणक्य नीति के रूप में देखा जाता रहा है लेकिन इस बार बीजेपी बौखलाहट में चाणक्य नीति के विपरीत बुद्धी से जादा बल का प्रयोग करती नज़र आ रही है यह भाजपा की अपनी सत्ता जाने का भय माना जाए या तानासाही का जुनून ये तो सभी को नजर आ रहा है इसमें कुछ छिपा नही है हा यह दुख की बात ये है की भाजपा जैसी मर्यादित विचार धारा वाली पार्टी अपने ही देश के नागरिको के लिए आमर्यादित फैसले लेती नज़र आ रही है दिल्ली के जंतर मंतर को जंग के मैदान में बदल दिया है हलाकि अबतक जो भी हो रहा है वह दुखत है जबकि यह मैदान अधिकार प्राप्त आन्दोलन स्थल है जहां युवा आन्दोलन करने का प्रयास कर रहे है हलाकि स्वतंत्र भारत की यह पहचान भी है की सत्ता में काबिज सरकार के किसी भी फैसले के विरूद्ध आम नागरिको व विपक्षी दलों द्वारा अपनी उन बातो को विरोध प्रदर्शन कर सत्ता के गलियारों में पहुचाया जाता है जो बाते सरकार मानने से इनकार करती है और ये देश के लोगो का संवैधानिक अधिकार भी है

तिलचट्टा बनाम कॉकरोच पार्टी के अभीजीत उनके साथी व विपक्षी पार्टीयों के कुछ प्रमुख नेता केजरीवाल ममता दीदी व अन्य नेताओं द्वारा देश के युवाओं से अपील की गई थी की जंतर मंतर पहुच कर भाजपा व चुनाव आयुक्त के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेना है इस अपील के मददेनज़ दिल्ली पुलिस ने भारी पुलिस बल व अन्य रक्षा बल की टुकड़ियों के समूह को जंतर मंतर के आस पास तैनात कर दिया था ऐसा मंज़र था कि किसी बड़ी जंग का आगाज होने वाला है दिन बीतने के साथ प्रदर्शनकारियों के धरपकड़ का दौर सुरू हुआ दिन के अन्त तक चलता रहा किसी को टांग पकड़ कर खीचा गया किसी को घसीट कर डिटेन किया जाने लगा किसी का खून बहा किसी के कनड़े फटे कुछ गम्भीर घायल हुए मीडिया कर्मीयों के कैमरों पर वार हुआ जिसमें कुछ कर्मी मार पीट का शिकार हुए ऐसा लग रहा था कि ये जंतर मंतर नही कोई भेड़ियों का शिकार स्थल हो जैसे ही कोई प्रदर्शनकारी नज़र आए उसे शिकार के रूप में पुलिस कर्मियों द्वारा झुंड बनाके दबोच लिया गया और शिकारी पिंजड़े में डाल दिया गया । दिल्ली में 4 दर्जनो से ज्यदा मेट्रो स्टेशन बन्द किए गए 70 से ज्यदा ट्रेनों को बाधित किया गया वही लग भग 40 000 पुलिस बल समेत अन्य बल तैनात रहे प्रदर्शनकारियों के साथ साथ आम नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा

धारा 163 के उल्लंघन पर दिल्ली पुलिस का एक्शन

दिल्ली में अलग.अलग थानों में करीब 20 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई और तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस के अनुसार ये सभी एफआईआर धारा 163 के उल्लंघन मारपीट और पथराव करने आदि के मामले में दर्ज की गई है। सभी एफआईआर अभी अज्ञात के खिलाफ ही की गई है। सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और जांच से जिनकी संलिप्तता का पता चलेगा पुलिस उन्हें मुकदमे में आरोपी बनाएगी।
उसके बाद भी दूसरे दिन जारी रहा अन्दोलन आखिर यह आन्दोलन कहा जा कर रूकेगा ये अन्दाजा लगाना मुश्किल है

वही प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर क्या बोले कॉकरोच

आशुतोष रांका सौरव दास और रत्ना सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया इस दौरान सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके मौजूद नहीं रहे क्योंकि वे अपनी दादी के देहांत के चलते अपने पैतृक गांव लौट गए हैं वही प्रेस कॉन्फ़्रेंस में आशुतोष रांका ने कहा नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के अब तक के सबसे कायर प्रधानमंत्री हैं सौरव दास ने आरोप लगाते हुए कहा ये वो सरकार है जिसने नीरव मोदी और विजय माल्या को फ़्लाइट में बैठाकर देश से बाहर भेज दिया है जबकि हमें फ़्लाइट के अंदर से उठवा लिया गया हिरासत में लिए जाने को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा जब हमें अगवा किया गया तब कोई पेपरवर्क नहीं किया गया बल्कि माफ़िया डॉन की तरह पुलिस आई और उठाकर ले गई।

प्रदर्शन के मददेनज़र सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई करते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए और राजधानी में मेट्रो व रेल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रखी जाएं। कोर्ट कि जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने 9 अक्टूबर के अपने आदेश के कथित उल्लंघन और 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के मामलों पर तत्काल सुनवाई करते हुए कई अहम आदेश दिए।

मेट्रो और रेलवे सेवाओं की बहाली. अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के मुताबिक चले और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से काम करे। बैरिकेड्स हटाने के निर्देश. कोर्ट ने कहा कि जब तक कानून.व्यवस्था की स्थिति को लेकरष्बेहद जरूरीन हो शहर से सभी बैरिकेड्स हटा दिए जाने चाहिए ताकि आम लोगों की आवाजाही सामान्य हो सके।
इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून.व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की जानी चाहिए। . अदालत ने यह भी साफ किया कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है लेकिन यह प्रक्रिया पुलिस एक्ट और कानून के दायरे में ही होनी चाहिए। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया
हो रहे इस आन्दोलन की विदेशी मीडिया में भी चर्चा गरम हो गई है वही यूएनओं के मांवाधिकार आयोग द्वारा प्रदर्शन के दौरान हुई बरर्बता को लेकर भारत सरकार की आलोचा की गई है जिस पर भारत सरकार की ओर से आयोग को भारत का अपना आंतरिक मामला बताया गया है।

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