द व्यूज़ ब्यूरों लखनऊ

अनुसूचित जाति के बेरोजगार युवक को पानी का प्लांट लगाने के लिए मिलने वाले 25 लाख रुपये के अनुदान की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने वाले को भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।
दोनों आरोपितों ने पहले 250 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में एक लाख रुपये में सौदा तय कर 50 हजार रुपये तत्काल देने की बात हुई। ट्रैप टीम ने रुपये लेते हुए दोनों को पकड़ा। बरामद नोटों के क्रमांक शिकायतकर्ता द्वारा पहले दर्ज कराए गए क्रमांकों से मिलाए गए।
एंटी करप्शन के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में एससी एसटी ;क्रियान्वयन और प्रबंधन राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड द्वारा किया जाता है। हब लखनऊ के प्रबंधक रवि ओरन और बैंकिंग प्रोफेशनल विवेकानन्द वर्मा शामिल हैं। रवि ओरन केंद्रीय अराजपत्रित कर्मचारी हैं जबकि विवेकानन्द वर्मा आउटसोर्सिंग कर्मचारी है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात और 12 के तहत कार्रवाई की गई है। बख्शी का तालाब निवासी आशीष कुमार ने 19 सितंबर को भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत की थी।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार की योजना के तहत पानी का प्लांट लगाने के लिए 25 लाख रुपये के अनुदान का आवेदन बैंक के माध्यम से किया था। एससी एसटी हब के कर्मचारियों ने 20 मई को प्लांट का निरीक्षण किया लेकिन रिपोर्ट आगे नहीं भेजी गई। आरोप है कि तीन सितंबर को विवेकानन्द उन्हें हजरतगंज स्थित श्रीराम टावर के कार्यालय ले गया। वहां प्रबंधक रवि ओरन ने अनुदान पास कराने के लिए 10 प्रतिशत की व्यवस्था करने को कहा। शिकायत के सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने ट्रैप की योजना बनाई। 24 सितंबर को टीम ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये के नोट लेकर उन्हें फिनाफ्थलीन से ट्रीट कराया और दो सरकारी कर्मचारियों को स्वतंत्र गवाह बनाया।
मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन के उसे कार में बैठाकर कुछ दूर ले गया और 50 हजार रुपये ले लिए। इसके बाद रुपये कार के आगे बने बाक्स में रखे गए। विवेकानन्द के अनुसार बाद में रवि ओरन ने रुपये गिने। दोनों की निशानदेही पर आइआइएम रोड स्थित कृष्णा कालोनी में एक मकान के बाहर सीढ़ी के नीचे से काली पालीथीन में लिपटे 50 हजार रुपये बरामद किए गए। ट्रैप टीम ने कार को भी कब्जे में लिया है।