

निज़ाम रावी………
कहते है….. सबर का फल मीठा होता है जिसका उधारण मायावती के इशारे पर आए जनसैलाब को देख कर लगाया जा सकता है जिसने राख से चिंगारी निकाल कर आग का गोला बना दिया । सरज़मीने लखनऊ में जिस तरह से लोगो के सैलाब ने एक स्थान पर ज़मा होकर बुझी हुई बसपा को जीवित करके दिखाया है यह राजनीतिक टिप्पड़ीकार पंण्डितों के मुह पर कालिक पोतने जैसा है। जिसमें गोदी मीडिया व अन्य सामिल है जिन्होने अपनी बयानों से यह झड़ी लगा दी थी कि बसपा बिखर गई बसपा खतम हो गई मायावती डर गई मायावती का राजनीतिक कैरियर खत्म हो गया जैसी अनेक बातो की बौछार लगाई हुई थी बसपा के जिंन का चराग वाले प्रदर्शन से उन सभी महान कलाकारों पर सटीक तमाचा पड़ा है और यह उधारण दिया है कि लफाजी और झूटी कयाशबाजी के बयानों से अपनी दुकानों को न सजाया जाए उन्हें अब चेतने की जरूरत है इस कारण कही लोकतंत्र से जुड़ी समाज का आईना कही जाने वाली मीडिया व अन्य संसाधनो पर सेे लोगो का भरोंसा पूरी तरह से खत्म न हो जाए।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी ;बीएसपी प्रमुख मायावती ने नौ अक्तूबर को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रैली की। लोकसभा चुनाव 2024 में हार के बाद मायावती की इस रैली को उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है लखनऊ में विधानसभा भवन से तक़रीबन 10 किलोमीटर दूर खचाखच भरे कांशीराम स्मारक स्थल से उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया
मायावती ने इस दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की आलोचना की लेकिन यूपी की भारतीय जनता पार्टी ;बीजेपी सरकार का आभार जताया है इस बयान से राजनीतिक पंण्डितों कोेे मसाला मिल गया है जो पटाको के रूप में दगने शरू हो जाएगे ।
राज्य में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में होने के साथ ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं मायावती ने दोनों दलों पर तीखा हमला बोलकर यह संदेश देने की कोशिश की कि बीएसपी किसी भी मोर्चे या गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने जा रही है
राजनीतिक विश्लेषकों की बयान बाजी में इस मुद्दे पर मायावती का आज का बयान बीएसपी से ज़्यादा बीजेपी के लिए फ़ायदेमंद है क्योंकि विपक्ष के वोट के बिखराव से बीजेपी को लाभ मिलेगा लेकिन इस वक़्त मायावती का निशाना बिहार चुनाव है
अपने भाषण में कांग्रेस को नाटकबाज़ और सपा को दलित.पिछड़ों का उत्पीड़क बता कर यह साफ़ किया है कि बीएसपी का फ़ोकस अपने पुराने जनाधार की वापसी पर ही रहेगा मायावती ने अपनी रैली में कहा कि समाजवादी पार्टी जब सरकार में रहती है तब न उन्हें पीडीए ;पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक याद आता है न कांशीराम की जयंती और न ही उनकी पुण्यतिथि याद आती है
मायावती ने इस रैली में भाषण के दौरान बीजेपी की तारीफ़ मे उन्होंने रैली में कहा मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ;योगी आदित्यनाथ को लिखित चिट्ठी के ज़रिए कहा और आग्रह किया कि कांशीराम स्मारक में एंट्री टिकटों के पैसे को स्मारक और पार्कों के रखरखाव पर लगाया जाए और उत्तर प्रदेश की वर्तमान बीजेपी सरकार ने इस मामले को संज्ञान में लेकर हमसे वादा किया कि जो भी पैसा टिकटों के ज़रिए आता है वह इन स्थलों के रखरखाव के लिए लगाया जाएगा इसलिए हमारी पार्टी उनके प्रति आभार व्यक्त करती है
इस बयान पर अन्य नेताओ की पटाको के रूप में बयानबाजी
हालांकि एक बयान के मुताबिक बसपा से बागी कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी इससे इनकार करते हैं वो कहते हैं कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कांशीराम की पुण्यतिथि पर होर्डिंग लगाए हैं
उनका कहना है कि कांशीराम जी के विचार सभी दलित शोषित समाज के लिए हैं कांग्रेस ने विचार गोष्ठी भी की है
इस बीच अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए एक्स पर एक पोस्ट किया
उन्होंने लिखा क्योंकि उनकी अंदरूनी सांठगांठ है जारी इसीलिए वो हैं ज़ुल्म करने वालों के आभारी
हलाकि राजनीति में कभी कुछ भी संभव है जो आज टिप्पड़ी कार बने है वह कल मित्र बन चुनवा लड़ चुके है इसमें यह कहा जा सकता है कि कभी तल्ख़ रिश्ते और कभी साथ में चुनाव इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच रिश्ते तल्ख़ रहे हैं हालांकि दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव भी लड़ चुकी हैं
समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने अखिलेश यादव की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बीएसपी बीजेपी को राजनीतिक संकट से बचाना चाहती है
उन्होंने कहा बीजेपी पर जब भी संकट आता है तो वो कौन सा बटन दबाते हैं कि बीएसपी की चाल बदल जाती है
उनका कहना है जब चीफ़ जस्टिस पर हमला हो रहा है रायबरेली में दलित की जान ले ली गई ऐसे में बीजेपी की तारीफ़ करना तार्किक नहीं लगता है समाजवादी पार्टी की आलोचना मायावती पुरानी बातों को लेकर कर रही हैं
हालांकि समाजवादी पार्टी के साथ बीएसपी का 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन भी हुआ था बीते चुनाव में मायावती और मुलायम सिंह के बीच सुलह भी हो गई थी मायावती ने सपा के लिए प्रचार भी किया था लेकिन अपनी रैली में मायावती ने कहा कि गठबंधन के अनुभव बीएसपी के लिए फ़ायदेमंद नहीं रहे 1993 और 1996 के चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी बीएसपी ने दूसरे दलों के साथ हाथ मिलाया पार्टी की सीटें और वोट शेयर दोनों घटे थे 1993 के चुनाव में बीएसपी ने सपा और 1996 में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था
मैदान में जमा अपने कार्यकर्ताओं से मायावती ने कहा गठबंधन में बीएसपी का वोट तो दूसरे दलों को ट्रांसफ़र हो जाता है लेकिन दूसरी पार्टियों का वोट उनकी पार्टी को नहीं मिलता है के बयान पर
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा 2019 के गठबंधन के इस चुनाव में बीएसपी के 10 सांसद जीते तो समाजवादी पार्टी के सिर्फ पांच ही लोकसभा तक पहुंच पाए इस वक़्त समाजवादी पार्टी दलित शोषित और वंचित की लड़ाई के लिए कांग्रेस के साथ है पहले भी कई दलों से इस वजह से गठबंधन किया था
अखिलेश के ट्वीट पर बीजेपी का पलटवार
मायावती के भाषण के बाद अखिलेश यादव के ट्वीट पर बीजेपी के प्रवक्ता कहते हैं अखिलेश यादव ये जवाब दें कि आखिरकार कांशीराम के नाम पर बने कासगंज ज़िले का नाम क्यों बदल दिया
पार्कों के रखरखाव पर मायावती की तारीफ़ पर प्रवक्ता कहते हैं आभार तो अखिलेश यादव को भी जताना चाहिए उनके लोकार्पण किए गए अधूरे प्रोजेक्ट को बीजेपी ने पूरा किया है क्योंकि बीजेपी जनहित की राजनीति करती है
हालांकि बीजेपी के नेता समाजवादी पार्टी के उन आरोपों से इनकार करते हैं कि मायावती से उनका कोई अंदरूनी समझौता है
एक राजनीतिक जानकार के अनुसार उनका कहना है कि
मायावती के बयान के दूसरे मायने नहीं निकाले जाने चाहिए मायावती की सपा.कांग्रेस से नाराज़गी के बारे में बीएसपी की राजनीति को कई साल से कवर करने वाले वरिष्ठ जानकार के अनुसार मायावती के भाषण में अखिलेश यादव पर प्रहार और बीजेपी तथा योगी सरकार को धन्यवाद के दूसरे मायने नहीं निकाले जाने चाहिए क्योंकि रैली कांशीराम पर केंद्रित थी
मायावती ने कांग्रेस को भी निशाना बनाया है उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी लगाकर संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों का अपमान किया था मायावती ने कहा कि अब कांग्रेस नेता संविधान की प्रति लेकर नाटकबाज़ी कर रहे हैं
इसके जवाब के पलटार में कांग्रेस के एक नेता ने अपने बयान में कहा कि इस देश को बाबा साहेब की अगुआई में संविधान कांग्रेस ने दिया है पार्टी के नेता राहुल गांधी ने संविधान को बचाने के लिए 10 हज़ार किलोमीटर की पद यात्रा की है जब इंडिया गठबंधन बन रहा था तो मायावती कहां थीं इस प्रकार के बयान सिर्फ़ बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए है
वही एक और राजनीतिक जानकार की माने तो उनका कहना है कि बीएसपी की चिन्ता का विषय सपा और कांग्रेस के साथ ही यह भी है कि दलित मतदाता बीएसपी से पहले कांग्रेस का परंपरागत वोटर रहा है इसलिए उनको डर है कि एक बार ये कांग्रेस की तरफ़ गया तो पलट कर आना मुश्किल है हलाकि माना जा रहा है कि दलित वोटर अब कांग्रेस की तरफ़ लौट रहे हैं इसलिए भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों इस बात से चिंतित हैं
सपा के पीडीए फॉर्मूला का प्रदर्शन भी लोकसभा में अच्छा रहा है इसलिए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये भी एक वजह हो सकती है कि मायावती अपने समर्थकों से दोनों ही पार्टियों से समान दूरी बनाने के लिए कह रही हैं
मायावती राज्य की चार बार मुख्यमंत्री बनीं लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं कर पाईं मायावती की इस रैली को उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर से सक्रिय होने के रूप में भी देखा जा रहा है
बीएसपी अब उस स्थिति में नहीं है जो 2007 में थी जब उसने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी लेकिन लखनऊ के इस जनसैलाब ने यह संकेत ज़रूर दिया कि मायावती का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया के जुम्लोें को बदल कर दिखया है बल्कि उनके समर्थकों में अब भी भावनात्मक जुड़ाव है प्रदेश में दलित समुदाय का बड़ा तबका अब भी उनको नेता के तौर पर देखता है
भविष्य की रणनीति.आकाश आनंद
मायावती की रैली में आकाश आनंद को ख़ास जगह दी गई है इस रैली में मायावती के साथ बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद का भी संबोधन विशेष रूप से चर्चा में रहा है आकाश आनंद ने कहा कि आरक्षण का पूरा लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है उन्होंने दावा किया कि केवल बसपा सरकार ही दलितों और पिछड़ों को उनका हक़ दिला सकती है
आकाश आनंद ने अपने भाषण में कहा यूपी की जनता को मायावती की ज़रूरत है जातिवाद से पीड़ितों को मान.सम्मान की ज़िंदगी मायावती ने दी है
विश्लेषक मानते हैं कि आकाश आनंद को सामने लाकर मायावती पार्टी में एक पीढ़ीगत बदलाव का संदेश दे रही हैं क्योंकि पिछले 13 साल में पार्टी का जनाधार कमज़ोर हुआ है 2012 के बाद से बीएसपी की विधानसभा में सीट कम हो रही है 2022 में उसे केवल एक सीट मिली हैण्
ऐसे में संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए मायावती अब नए चेहरों पर भरोसा दिखा रही हैं हालांकि आकाश आनंद को मायावती कई बार पार्टी के पदों से हटा भी चुकी है
हलाकि यह कहना गलत न होगा कि मायावती के सरकार में रहते हुए भी कई रैलियां हुई थी लेकिन यह रैली लगातार 13 साल से विपक्ष में होने के बाद हुई है इससे पहले 2014 में रमाबाई आंबेडकर मैदान और 2021 में कांशीराम स्मारक स्थल पर रैली हुई थी राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बीएसपी अब एक बार फिर सर्वजन हिताय की नीति को दोहराने की कोशिश कर रही है जिसके तहत वह दलितों के साथ सवर्णों पिछड़ों और मुसलमानों को भी जोड़ने की बात कर रही है
मंच पर तीन मुस्लिम नेता भी हुए शामिल आकाश आनंद कोे मिला विशेष दर्ज़ा
मंच पर तीन मुस्लिम नेताओं को बिठाना आकाश आनंद को भाषण का मौका देना भी रैली की विशेष बात है जिन तीन मुस्लिम नेताओं को मायावती के साथ जगह मिली है उनमें मुनक़ाद अली नौशाद अली और शमशुद्दीन राईन सामिल है इसके अलावा बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह भी थे
राजनीतिक विश्लेषक कि माने तो बीएसपी के पास यही तीन मुस्लिम नेता हैं लेकिन बीजेपी की तारीफ़ करके मायावती ने अंजाने में कही मुसलमानों को चोट तो नही पहुचा दी है यह तो आने वाला वक्त बता देगा लेकिन यह तो तय है कि बसपा की इस रैली ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में भुचाल मचादिया है जिसका एतिहासिक परिणाम भी सामने आएगा।