
RAVI JI

कहते है.….. सत्ता की भूक घमण्ड के शिखर तक पहुचा देती है बदगुमानी के कारण व्यक्ति कामयाबी की जगह वीरानों कें खण्डहर की वादियों में पहुच जाता है जहा उसे सिर्फ तनहाईयां सताने लगती है और खौफ बढ़ जाता है तब जाकर उसे वो दोस्त याद आते है जो कभी समझाया करते थे कि तुम गलत राह पर हो सुधर जाओ। यह उधारण इसराइल पर सच साबित हो सकता है अगर वह समय रहते नही जागा।
दुनियाभर के दानिशवर कलमकारों के विचारों की माने तो उनका इसारा दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने की ओर है। जिसका उधारण दुनिया में बीते कुछ वर्षो में हुए युद्ध के हालातो से लगाया जा सकता है।
ग़ज़ा में युद्ध ने कैसे बदला मध्य पूर्व और दुनिया का शक्ति संतुलन
अब बात करते है इसराइल और ग़ज़ा के वार की ग़ज़ा में दो साल के युद्ध का असर सिर्फ़ उस छोटे इलाके़ तक सीमित नहीं रहा है इस संघर्ष का दायरा लेबनान सीरिया ईरान और यमन तक फैल चुका है जानकारो की माने तो इस युद्ध ने न सिर्फ़ मध्य पूर्व की राजनीति बदली है बल्कि दुनिया के इस क्षेत्र में हुए वार के हालातो से रिश्ता भी नया रूप ले चुका है
इन हालातो के मददेनजर कलमकारों के मुताबिक इस बारे में कुछ भी बढ़ा.चढ़ाकर बताया या लिखा नही जा सकता है बीते इन वर्षो के बाद यह क्षेत्र और दुनिया कितनी बदल जाएगी इसका असर बहुत गहरा है 7 अक्तूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इसराइल पर हुआ हमला इसराइल के इतिहास का सबसे घातक हमला था इसमें लगभग 1200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया। हलाकि इस हमले ने उस धारणा को तोड़ दिया कि इसराइल की सुरक्षा को भेदा नहीं जा सकता है यह इतिहास का गहरा पन्ना बनगया। हुई इस घटना के बाद इसराइल की क्या भूमिका रही यह दुनिया ने बखूबी देखा है और दुनिया जानती भी है। अब बात करते है जंग की…..
जंग का क्या है असर…….
इसराइल जो ग़ज़ा की सीमाओं तटरेखा और हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है उसने ग़ज़ा में भारी सैन्य कार्रवाई शुरू की हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दो साल में 68000 से ज़्यादा फ़लस्तीनियों की मौत हुई है संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों को मानता है ग़ज़ा में हुई तबाही और वहां के लोगों को लगा सदमा कल्पना से परे है और इसका असर पीढ़ियों तक रहेगा वहीं इसराइल पर हमास का हमला और बंधक बनाने की घटना ने उस समाज को हमेशा के लिए बदल दिया है
बदले की भावना और बड़ा वार
दुनिया की खबरो के विषेशज्ञ के अनुसार सीरिया और हमास सहित ये सभी गुट लंबे समय से ईरान समर्थित एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस का हिस्सा रहे हैं
इसराइल इन सब गुटों के ख़तरे में रह रहा था और इन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन 7 अक्तूबर के बाद उसने तय किया कि अब सिर्फ़ प्रतिरोध से काम नहीं चलेगा इसराइल ने पहले हमास फिर हिज़्बुल्लाह और फिर ईरान पर हमला किया यह उनकी सुरक्षा स्थिति के विश्लेषण में एक बड़ा बदलाव था इसराइल ने दक्षिणी ग़ज़ा पर हमले शुरू किए सितंबर 2024 में इसराइल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के सदस्यों के हज़ारों पेजर्स और वॉकी.टॉकी में विस्फोट कराया इसके बाद उसने देश में बमबारी शुरू की और इसके बाद दक्षिण में ज़मीनी अभियान चलाया
इसराइल के हवाई हमले में हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह सहित उनके कई शीर्ष नेता मारे गए साथ ही उनके कई इन्फ़्रास्ट्रक्चर और हथियार नष्ट हो गए
जवाबी कार्यवाई और वार
हिज़्बुल्लाह की ओर से इसराइल पर महीनों तक रॉकेट दागे जाने के बाद इसराइली सेना ने लेबनान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए
इसराइल और ईरान के बीच युद्ध का ख़तरा दशकों से मध्य पूर्व पर मंडरा रहा था लेकिन हिज़्बुल्लाह के पास लॉन्ग रेंज मिसाइलों के साथ हथियारों के बड़े भंडार की मौजूदगी से ये ख़तरा टलता रहा
जानकारो के मुताबिक इसराइल और ईरान वर्षों से एक.दूसरे पर गुप्त कार्रवाई के ज़रिए हमला करते रहे हैं लेकिन दोनों में से किसी ने भी कभी एक.दूसरे पर सीधा हमला नहीं किया था लेकिन अप्रैल 2024 अक्तूबर 2024 में दोनों देशों के बीच तनाव हवाई हमलों में बदल गया वहीं जून 2025 में इसराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए जिससे 12 दिन का युद्ध छिड़ गया अमेरिका ने भी इसमें हिस्सा लिया और बंकर बस्टर बम गिराए इसके बाद क़तर के साथ मिलकर इसराइल और ईरान के बीच युद्धविराम कराया हलाकि इस युद्ध में इसराइल ने ईरान की कई मिसाइलों को रोक लिया था लेकिन कुछ मिसाइलों से घातक हमले में नुक़सान हुआ
बड़े स्तर पर असर
कुछ जानकारो का मानना है की हुई इन सभी घटनाओं से इसराइल पर हमला करने के लिए ईरान का प्रॉक्सी सिस्टम बड़ी तादात में प्रभावित हुआ है हमास हिज़्बुल्लाह और ईरान अब पहले से कमज़ोर हो गए हैं ये सब जिस तेज़ी से हुआ वह पूरे क्षेत्र को हैरान करने वाला रहा है।
इसराइल ने कहा कि ईरान पर उसके हमलों में परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया लेकिन ईरान का कहना है कि मारे गए लोगों में आम लोग भी शामिल थे
दुनिया में युद्ध का प्रभाव
ईरान के एक और सहयोगी रूस ने बशर.अल.असद की सत्ता के पतन के साथ इस क्षेत्र में एक अहम साथी और समर्थक खो दिया सीरिया में गृहयुद्ध के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सीरिया के मौजूदा राष्ट्रपति अहमद अल.शरा एक.दूसरे के विरोधी थे इस दौरान रूस ने बशर.अल.असद की मदद के लिए क्रूर सैन्य बल का इस्तेमाल किया था सीरिया में रूस के दो बड़े सैन्य अड्डे हैं जिनसे उसे अफ़्रीका में अपने सैन्य अभियानों में मदद मिली है शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि राष्ट्रपति अहमद अल.शरा रूसी सैन्य अड्डों की मंज़ूरी देंगे या नहीं
विश्लेषकों के अनुसार मध्य पूर्व में चीन का प्रभाव भी घटा है
युद्ध से पहले चीन मध्य पूर्व में शांति और व्यापार मध्यस्थ के तौर पर उभर रहा था और उसने ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंधों को बहाल करने के लिए एक समझौते की मध्यस्थता की थी लेकिन ग़ज़ा युद्ध ने अमेरिका का ध्यान वापस मध्य पूर्व की ओर खींच लिया है और चीन ने काफ़ी हद तक पीछे हटने का फ़ैसला किया है
तुर्की बना सीरिया का सहयोगी
वहीं तुर्की अब सीरिया की नई सरकार का क़रीबी सहयोगी बन रहा है दशकों तक सीरिया ईरान और रूस के प्रभाव में था लेकिन अब तुर्की की काफ़ी मज़बूत भूमिका होने की संभावना है
कतर की शान्तिदूत के रूप में मध्यस्थ की राजनीतिक भूमिका
क़तर जहां हमास का राजनीतिक नेतृत्व है और अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है मध्यस्थ की मुख्य भूमिका में था सितंबर 2025 में इसराइल ने क़तर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं पर हवाई हमला किया जिससे क़तर नाराज़ हो गया और ग़ज़ा में युद्धविराम में बाधा पहुंचने की आशंका बढ़ गई हालांकि जानकारो का मानना है कि अमेरिका के सहयोगी क़तर पर हुआ ये हमला ष्युद्ध के अंत की दिशा में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ
ग़ज़ा में युद्धविराम के बाद मिस्र में हुआ शिखर सम्मेलन
मिस्र और क़तर के साथ.साथ तुर्की ने भी ग़ज़ा में युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई जानकारों की माने तो क़तर ने अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी मांगी जो कि ट्रंप ने दी इसकी क़ीमत ये थी कि हमें इस युद्ध को ख़त्म करना होगा इसलिए आपको हमास को सौंपना होगा साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस युद्ध को ख़त्म करने के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर दबाव बढ़ा दिया साथ ही नेतन्याहू को क़तर से माफ़ी मांगने के लिए मजबूर किया
वैसे जानकारों की माने तो क़तर मिस्र और तुर्की ने हमास को बातचीत के लिए तैयार करने और ट्रंप के प्रस्ताव को गंभीरता से लेने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई फ़्रांस ब्रिटेन कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का फ़लस्तीन को मान्यता देने से भी भारी असर पड़ा
हालांकि कुछ प्रभावसाली व्यक्तियों का अनुमान है कि इस क़दम से क्षेत्र के अन्य देशों को हमास पर युद्धविराम के लिए दबाव डालने में आसानी हुई
कई देशों के जनाक्रोश का भी पड़ा प्रभाव इसराइल नकारता रहा आरोप
अक्तूबर में जो युद्धविराम समझौता हुआ उसके पीछे ग़ज़ा में इसराइली सेना के अभियान और वहां की मानवीय स्थिति को लेकर कई देशों में बढ़ता जनाक्रोश भी था अगस्त मे संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली एक संस्था ने अगस्त में कहा था कि ग़ज़ा में अकाल पड़ा है जबकि इसराइल ने इसे झूठ बताया अगले महीने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र की एक जांच रिपोर्ट ने इसराइल पर ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ जनसंहार का आरोप लगाया जिसे इसराइल ने भ्रामक और ग़लत बताया
विरोध प्रदर्शन के हवाले से
हलाकि यूरोप की जनता भले ही ग़ज़ा में इसराइल की सैन्य गतिविधियों को नरसंहार न कहे लेकिन वो इसकी खुले तौर पर आलोचना करने लगी है यही भावना अमेरिका में भी फैल गई है कुल मिलाकर इसराइल आज इस क्षेत्र में एक सैन्य प्रभुत्व वाले देश की तरह दिखता है लेकिन उसकी सैन्य गतिविधियों का एक नतीजा इसराइल को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर झेलना पड़ा है इसराइल आज दशकों पहले से कहीं अधिक अलग.थलग है
संयुक्त राष्ट्र 1967 से फ़लस्तीन ;जिसमें ग़ज़ा और वेस्ट बैंक शामिल हैं को इसराइल.अधिकृत क्षेत्र मानता है
विशेषज्ञों कि माने तो अक्तूबर में ग़ज़ा युद्धविराम समझौते के बाद बहुत कुछ अनिश्चित बना हुआ है हमास के हथियार छोड़ने से लेकर ग़ज़ा के लिए धन और सुरक्षा बलों की व्यवस्था तक और क्या फ़लस्तीन की मान्यता का कोई भरोसेमंद रास्ता निकल पाएगा फिर भी जानकारों के मुताबिक क्षेत्र पूरी तरह बदल चुका है और कुछ संबंधों में बड़े बदलाव आए हैं जानकारों की माने तो मध्य पूर्व पर नए सिरे से ध्यान दिया जा रहा है उम्मीद है कि इससे इस क्षेत्र में अब तक देखे गए युद्ध और संघर्ष के बजाय कुछ बेहतर करने के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता पैदा होगी और भविष्य में अनोखे बदलाव भी देखने को मिलेंगे हलाकि इस हैवानियतकार बदले की भावना वर्चस्व व सत्ता की भूक ने दुनिया के कई क्षेत्र व नक्से में बदलाव ला दिया है और गुलजार हो रही दुनिया की खूबसूरती पर ग्रहण लगादिया है। जो इबरतनाक साबित हुई है। और यह भी देखा जा रहा है कि दुनिया के कई कमजोर नज़र आने वाले देश हुई इस घटना से इबरत हासिल कर अपनी ताकत की भूक को बढ़ाने में लग गए है।