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आज के इस डिजिटल बिज़नेस मीडिया क्रांति के दौर ने सामाजिक सोच में एक बदलाव ला दिया है। जिसके परिणाम वास्तविकता को नकारते नज़र आ रहे हैं। व्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में विचारों के आदानण्प्रदान में जिस डिजिटल मीडिया क्रांति की व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है उसी व्यवस्था का दुरुपयोग सच और झूठ का फैसला करने वाली पारदर्शिता व्यवस्था के रूप में हो रहा है।
और समाज का दर्पण कही जाने वाली पत्रकारिता व्यवस्था भ्रष्ट होती जा रही है। इससे समाज में पत्रकारिता की छवि धूमिल हो रही है। इसके कई मुख्य कारण हैं जो पत्रकारिता व्यवस्था की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहे हैं। एक महान लोकतांत्रिक गणराज्य में नागरिकों को समझना और पारदर्शिता लाने की शक्ति को मजबूत करना आवश्यक है।
इसी प्रयास में लोकतांत्रिक ताकतों को मजबूत करने की एक कड़ी के रूप में सामाजिक संस्था आर फाउंडेशन और मीडिया सोसाइटी द्वारा एक आधुनिक द न्यूज़ टाइम वेब न्यूज़ चैनल शुरू किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी लाभ के पारदर्शिता के साथ बुराइयों को दूर करने और समाज में जागरूकता लाने वाली खबरों को साझा करने वाली पत्रकारिता के माध्यम से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ लोकतंत्र की शक्ति को मजबूत करना है।
वर्तमान समय में जब पत्रकारिता में स्वतंत्रता की बात आती है तब अधिकांश भारतीय समाचार तंत्र का व्यावसायिक मॉडल संपादकों को अपेक्षित स्वतंत्रता शायद ही कभी देता है। इससे भी बदतर इसमें रिपोर्टिंग के पेशेवर व्यक्तियों के मानकों को धीरेण्धीरे कमज़ोर किया है और अत्यधिक संपादकीयकरण पेड न्यूज़ और निजी समझौतों जैसी ज़हरीली प्रथाओं से मीडिया की पारिस्थितिकी तंत्र को दूषित किया है।
मीडिया संस्थान समाचारण्संकलन पर पैसा खर्च करने से कतराने लगे हैं और जैसेण्जैसे वे गौण व्यावसायिक हित विकसित करते हैं और ष्निषिद्ध क्षेत्र बढ़ते हैं उनके न्यूज़रूम को और भी अधिक नुकसान होता है ण् खासकर इसलिए क्योंकि ये हित अक्सर राजनेताओं और नौकरशाहों की नज़दीकियों पर निर्भर करते हैं। क्या यह कोई आश्चर्य की बात है कि पाठकों ने पेशेवर मानकों के क्षरण नैतिक उल्लंघनों और गुणवत्ता में गिरावट को नोटिस करना शुरू कर दिया है वे अब खुद को छोटा महसूस करते हैं।
द व्यूज़ टाइम का मूल सिद्धांत यह है कि अगर अच्छी पत्रकारिता को जीवित और फलनाण्फूलना है तो वह संपादकीय और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर ही ऐसा कर सकती है। इसका मतलब है कि मुख्य रूप से पाठकों और जागरूक नागरिकों के योगदान पर निर्भर रहना जिनकी गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता के लिए जगह बनाए रखने के अलावा कोई और रुचि नहीं है।
एक समाचार एजेंसी के रूप में द व्यूज़ टाइम जनता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगा। प्रामाणिक विश्लेषण और टिप्पणी प्रदान करने के अलावा जैसेण्जैसे हमारे संसाधन बढ़ रहे हैं हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व और रुचि के मुद्दों पर पारंपरिक रिपोर्टिंग द्वारा संचालित एक मंच के रूप में अपनी पहचान बनाना है। वेब पर होने का अर्थ है कहानियों को कहने के तरीके को बदलने के लिए नई मीडिया तकनीकों का उपयोग करना। ए आई के इस दौर में सावधानिया बरतते हुए आवश्यकता पड़ने पर वीडियो और ऑडियो डेटा और इंटरैक्टिव चार्ट के साथ कथा संरचना का अभिन्न अंग बनेंगे। हम आज एक साधारण शुरुआत कर रहे हैं जो हमारी दृष्टि से नहीं बल्कि हमारे संसाधनों और इस दौर की डिजिटत क्राती द्वारा सीमित है। इस बीच हम आपसे एक साधारण अपील करते हैं कि आप हमें पढ़ें हमारी सामग्री को साझा करें और सोसल संसाधनो सें हमें अपनी प्रतिक्रिया भेजें। धन्यवाद
संम्पादक..... निज़ाम रावी